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Echoes of Kinnaur: Life in the Last Villages

भारत का आखिरी गांव चिटकुल – किन्नौर की 11300 फीट ऊंचाई पर बसा स्वर्ग। यहां है लकड़ी और पत्थर से बने पुराने घर बर्फ से भी ठंडी बसपा रिवर और आलू के खेत। यहां सर्दियों में टेंपरेचर -20° तक चला जाता है। लोग खेतीबाड़ी या जरूरत का सामान गर्मियों में ही इकट्ठा कर लेते हैं। कहा जाता है कि किन्नौर की पहाड़ियों में हिमाचल के सबसे सुंदर गांव बसे हैं। ऐसा ही प्यारा सा विलेज एक और है रक्षम।

रक्षम गांव – चिटकुल से 10 किलोमीटर पहले छिपा खूबसूरत गांव

हम लोग दिल्ली से आए हैं, रक्षम चिटकुल से सिर्फ 10 कि.मी पहले आता है। लोगों ने इसे ज्यादा एक्सप्लोर नहीं किया है और यह इतना सुंदर गांव है कि इसकी हर गली एक परफेक्ट फ्रेम की तरह है। ज्यादातर लोगों के पास गाय और बकरियां हैं और वो अपना जीवन काफी सादगी से जीते हैं। बसपा नदी के किनारे रक्षम गांव के खेत नेचर की एक पोएट्री है जिसे सुनने के लिए आपको रक्षम आना पड़ता है।

दिल्ली से किन्नौर तक – पहाड़ों के खतरनाक लेकिन खूबसूरत रास्ते

किन्नौर के रास्ते एकदम स्टीप पहाड़ों को काट कर बनाए गए हैं और नीचे देखने पर आपको दिखती है सीधी गहरी खाई। जब मैं पहली बार आया था तो काफी डर लगा था लेकिन इस बार बिल्कुल भी नहीं। किसी महान इंसान ने कहा है कि मुश्किल रास्ते ही आपको सबसे खूबसूरत मंजिलों तक ले जाते हैं।

रक्षम में होमस्टे, लकड़ी के घर और पहाड़ी जीवनशैली

अक्सर पहाड़ी एरिया के अंदर क्या होता है कि ये लोग लकड़ियां जो है वो सुखा करके रख देते हैं गर्मियों के अंदर। ताकि सर्दियों में उनके काम आ सके, क्योंकि बर्फ बहुत ज्यादा पड़ती है और हमेशा ही पहाड़ी विलेजेस के अंदर ऐसा होता है।

रक्षम का सरकारी स्कूल – पहाड़ों के बीच पढ़ाई का अनुभव

रक्षम गांव में एक सरकारी स्कूल भी है जो फर्स्ट क्लास से 12th क्लास तक है, लेकिन गांव इतना छोटा होने की वजह से यहां सिर्फ 62 बच्चे ही पढ़ाई करते हैं। इमेजिन कीजिए कि आप एक ऐसे स्कूल के अंदर पढ़ाई कर रहे हैं जो चारों तरफ से पहाड़ों और पाइन ट्रीज के जंगलों से घिरा हुआ है। दूर-दूर तक सिर्फ वादियां दिखती हैं। बादल हमेशा पहाड़ों के नीचे आ जाते हैं। मौसम हमेशा ठंडा रहता है और सर्दियों में आपके स्कूल में बर्फ गिरती है।

चिटकुल – भारत का लास्ट विलेज और चाइना बॉर्डर

रक्षम के बाद मैं चला जाता हूं चिटकुल जो यहां से 10 कि.मी आगे है। चिटकुल इंडिया का लास्ट विलेज भी है क्योंकि इसके आगे आता है चाइना बॉर्डर। चिटकुल में आपको एक खुली वैली दिखेगी जिसमें आपको दूर तक खेती की हुई दिखती है। इस मौसम में ज्यादातर लोग आलू उगाते हैं।

राट ग्राट – पानी से चलने वाली आटा चक्की

चिटकुल के लोग नेचुरल चीजों का इस्तेमाल बहुत अच्छे से करना जानते हैं, और इसका परफेक्ट एग्जांपल है एक घराट। इस आटा चक्की को बोला जाता है जो पानी के फ्लो से चलती है। चिटकुल में 10 से 12 ऐसी घराट जो छोटी नहरों के साइड में बनाई गई है। जब नीचे से पानी तेज फ्लो में बहता है तो इसका टरबाइन घूमता है जिससे चक्की गेहूं को पीसती है, और बिना बिजली के आटा तैयार हो जाता है।

तिरंगा ट्रैक – चिटकुल का बेस्ट व्यू पॉइंट

इसके बाद हम लोग चले जाते हैं तिरंगा ट्रैक पर जहां से पूरा चिटकुल दिखता है। यह लगभग 40 से 50 मिनट का ट्रैक है जैसे ही आप गांव से थोड़ा सा ऊपर पहुंचते हैं। आपको चारों तरफ ग्रीनरी दिखने लगती है दूर तक वैली का व्यू आने लगता है।

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